बस्ती: बैजीपुरवा में खाकी की शह पर खनन माफिया का ‘तांडव’, छलनी हो रही धरती!
किसके दम पर बैजीपुरवा में चल रहा 'अवैध खनन' का काला खेल? मौन क्यों है प्रशासन?
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती का ‘कुरुक्षेत्र’: बैजीपुरवा में खनन माफियाओं का तांडव, खाकी की चुप्पी पर उठे सवाल
- बर्बाद होते किसान, मौन बैठे अधिकारी: क्या बैजीपुरवा के अस्तित्व का सौदा हो गया?
- बैजीपुरवा में ‘खनन माफिया’ बेखौफ, पुलिस की नाक के नीचे कानून का जनाजा!
- ‘नापाक गठजोड़’ की भेंट चढ़ा बैजीपुरवा का सिवान, एनजीटी के नियमों की उड़ी धज्जियां!
ब्यूरो, बस्ती मंडल: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में लालगंज थाना क्षेत्र का बैजीपुरवा गाँव इन दिनों विकास की भेंट नहीं, बल्कि खनन माफियाओं की हवस का शिकार हो रहा है। बैजीपुरवा के सिवान में दिन-रात गरजती जेसीबी मशीनों ने धरती का सीना छलनी कर दिया है। एनजीटी (NGT) के सख्त नियमों को ठेंगा दिखाते हुए माफियाओं का यह ‘काला खेल’ खुलेआम चल रहा है, और विडंबना देखिए—प्रशासनिक अमला मूकदर्शक बनकर तमाशा देख रहा है।
कानून का जनाजा और माफियाओं का ‘राज’
सवाल यह है कि आखिर किसके रसूख के दम पर यह सिंडिकेट इतना बेखौफ है? लालगंज पुलिस की नाक के नीचे से ट्रैक्टर-ट्रॉलियाँ मिट्टी ढो रही हैं, लेकिन खाकी की वर्दी पर धूल तक नहीं पड़ रही। क्षेत्र में चर्चा आम है कि ‘मलाई’ का खेल ऊपर तक सेट है, जिसके चलते थानों से लेकर दफ्तरों तक खामोशी का सन्नाटा पसरा हुआ है। क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी आँखें किसी मोटी ‘सुविधा शुल्क’ की पट्टी से ढंक रखी हैं?
किसानों की बर्बादी, माफियाओं की चांदी
बैजीपुरवा के उपजाऊ खेत अब गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं। जिस जमीन से किसान अपना पेट पालते थे, आज वहां खनन माफियाओं का तांडव चल रहा है। जो ग्रामीण इस अवैध धंधे के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत दिखाते हैं, उन्हें खुलेआम धमकियां दी जा रही हैं। दबंगई का आलम यह है कि गाँव के लोग अपने ही खेत बचाने के लिए प्रशासन की चौखट पर गिड़गिड़ाने को मजबूर हैं, लेकिन न्याय के बजाय उन्हें केवल कोरे आश्वासन मिल रहे हैं।
खाकी और खनन का ‘नापाक गठजोड़’
बैजीपुरवा की यह स्थिति प्रशासन के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। एक तरफ सरकार ‘भ्रष्टाचार मुक्त’ और ‘कानून का राज’ होने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ लालगंज के बैजीपुरवा में खाकी और खनन माफिया की जुगलबंदी सिस्टम को मुंह चिढ़ा रही है।
बड़ा सवाल: क्या पूरी तबाही का इंतजार है?
आज बैजीपुरवा का सिवान पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। अब सवाल यह उठता है कि क्या जिला प्रशासन तब जागेगा जब पूरा गाँव गड्ढों में तब्दील हो जाएगा? या फिर तब तक देर हो चुकी होगी?
बस्ती मंडल के उच्च अधिकारियों को अब इस ‘नापाक गठजोड़’ का संज्ञान लेना होगा। यदि तत्काल प्रभाव से इन माफियाओं पर नकेल नहीं कसी गई और मिलीभगत करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों का आक्रोश कभी भी एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
प्रशासन जागे, इससे पहले कि बैजीपुरवा का अस्तित्व ही मिट जाए!







